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ICC World Cup 2019: अफगानिस्तान के खिलाफ भारतीय टीम की सुस्ती ने आगे की रणनीति पर विचार करने के लिए हुआ मजबूर -इडिया न्यूज लाइव डाट नेट न्यूज टीम रिपोर्टर के अनुसार

इडिया न्यूज लाइव डाट नेट न्यूज टीम

लखनऊ:- विश्व कप में अफगानिस्तान के खिलाफ भारतीय टीम के मध्य क्रम की सुस्ती ने उसके आगे की रणनीति पर फिर से विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है। भारत को अगला मैच गुरुवार को ओल्ड ट्रैफर्ड स्टेडियम में वेस्टइंडीज से खेलना है। उसके गेंदबाज इस टूर्नामेंट में शॉर्ट गेंदों का जखीरा लेकर आए हैं, ऐसे में मध्य क्रम को ज्यादा मजबूत और दमदार खेल दिखाना होगा।

अफगानिस्तान के खिलाफ जब धौनी बल्लेबाजी करने आए थे तब भारत को करीब 24 ओवर की बल्लेबाजी करनी बाकी थी। यहां धौनी से एक अहम भूमिका की उम्मीद की जा रही थी। इससे पहले कोहली और विजय शंकर के बीच हुई साझेदारी ने भारत को नियंत्रण में रखा था। हालांकि शंकर खराब शॉट खेलकर आउट हो गए। रहमत शाह के एक अच्छे ओवर की बदौलत अफगानिस्तान ने मुकाबले में वापसी कर ली।

इंग्लैंड के खिलाफ पिछले मुकाबले में राशिद खान छोटी और सीधी गेंदों पर जमकर पिटे थे। कुछ वैसी ही गेंदबाजी वह धौनी के खिलाफ भी कर रहे थे लेकिन पूर्व कप्तान उसका फायदा उठाने में नाकाम रहे और लगातार कवर के फील्डर के हाथों में शॉट खेलते रहे। हताश धौनी क्रीज से बाहर निकालकर जब छक्का लगाने आए तब वह स्टंप हुए। धौनी का विकेट लेने के बाद अपने अगले ओवर में राशिद ने मेडन फेंका। 29वें ओवर की समाप्ति तक धौनी ने 13 गेंदें खेलीं थीं जिनमें से 11 पर कोई रन नहीं बना था। कोहली के आउट होने के बाद धौनी पर पारी संवारने के साथ-साथ रन गति को बढ़ाने की जिम्मेदारी थी लेकिन वह भारत को बीच मझधार में छोड़कर चले गए।

धौनी को जल्दी बदलना होगा गियर

जिन्होंने भी धौनी की बल्लेबाजी को नजदीक से देखा होगा वह यह जानते हैं कि धौनी पहले पिच पर आकर समय लेते हैं और फिर आखिर के कुछ ओवरों में ही अपना गियर बदलते हैं। इस दौरान उनके साथ बल्लेबाजी कर रहा खिलाड़ी भी उनका अनुशरण करता है। केदार जाधव भी कुछ ऐसा करते हैं। इस साल जनवरी में इन दोनों ने मेलबर्न में भारत के लिए एक अच्छी साझेदारी निभाई थी। यहां धौनी के लिए समस्या यह थी कि उन्हें लंबे निचले क्रम के साथ बल्लेबाजी करनी थी क्योंकि भारत चार विशेषज्ञ गेंदबाजों के साथ खेल रहा था। ऐसे में धौनी को अंत तक रुके रहना था और जाधव और हार्दिक पांड्या को अपनी बल्लेबाजी में तेजी दिखानी थी लेकिन यहां अफगानिस्तान ने बहुत चालाकी दिखाई। उसके स्पिनरों ने धीमी पिच का बखूबी फायदा उठाया।

भारत की धीमी बल्लेबाजी उस पर भारी पड़ी। टीम को जब चौके-छक्कों की जरूरत थी तब वह विकेट बचाने के लिए जूझती रही। कोहली के आउट होने के बाद 31वें से 36वें ओवर में भारतीय टीम की ओर से कोई भी चौका नहीं लगा। पूरे मैदान में भारतीय दर्शकों के बीच सन्नाटा पसरा हुआ था। हालांकि इसके बाद अगली कुछ गेंदों में धौनी और जाधव ने एक-एक चौके लगाए जिसके बाद भारत का अनुमानित स्कोर 250 रनों के करीब पहुंच गया था।

40 से 45 ओवर के बीच हुए पांच में से चार ओवर में महज दो-दो रन ही बने। इसके बाद राशिद द्वारा स्टंप आउट होने के साथ ही धौनी का फॉर्मूला फ्लॉप हो चुका था। धौनी के आउट होने के बाद जब हार्दिक पांड्या मैदान पर आए तो प्रशंसकों में खुशी की लहर दौड़ गई लेकिन वह भी कुछ खास नहीं कर पाए। ऐसे में टीम को ना सिर्फ तेज रन गति के साथ बल्लेबाजी करने की जरूरत है बल्कि उसे अपने दृष्टिकोण में भी लचीलापन लाना होगा। धौनी अंत तक खुद को बचाए रखने की अपनी आदत बनाए रख सकते हैं लेकिन यह तभी संभव है जब दूसरे छोर पर खड़ा उनका साथी तेज गति से रन बना रहा हो। भारतीय थिंक टैंक को यह भी पता लगाने की जरूरत है कि क्या वह चाहते हैं कि धौनी फिनिशर की भूमिका निभाते रहें, या फिर पांड्या को यह जिम्मेदारी देना ज्यादा सही होगा। पांड्या ने इस विश्व कप में ही कुछ ही मिनटों में ऑस्ट्रेलिया को मुकाबले से बाहर कर दिया था।

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