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राकेश शर्मा की एक रिपोर्ट

कुरूक्षेत्र -मई का महीना ओर इस महीने मे हर रोज गर्मो का बढता तापमान, चिलचिलाती धुप, लू के थपेड़ो से बचते हुए लोग जहंा अपने घरो में ही रहना पसन्द करते है वही कुरूक्षेत्र के मोहन नगर में भरी दोपहर को सोमपाल जो कि पलवल से कुछ मटके लेकर हर रोज सड़क के किनारे बैठ कर मटको के बिकने के बाट देख रहा है मानो उसकी निगाहें खरीददार को ढुुढ सी रही हो ओर वह सोच रहा हो कि कब उसके मटके बिके ओर वह भी इस भरी दोपहर की धूप से बचने के लिए अपने घर चला जाए लेकिन वह मजबूर सड़क किनारे बैठने के लिए । कुरूक्षेत्र से कुछ ही दुरी पर स्थित पलवल जहंा से सोमपाल अपने साइकिल पर मटको को लेकर हर रोज पहुंचता है मोहननगर चौंक पर ओर हर रोज कि तरह आज भी सोमपाल ने मटकों को कम्रबद्व तरीके से लगया लेकिन जब हमारी नजर उस पर पड़ी तो उससे बात करने को मन किया तो उसने अपना दर्द ब्यां करते हुए बताया कि वह पीढ़ी दर पीढ़ी यहां आता है ओर ताकि कुछ मटकों को बेच कर अपने परिवार का गुजारा चला सकूं वैसे तो उसके परिवार में उसकी पत्नी, दो बच्चें है जिनका पालन पोषण का बार उसके कधों पर है सोमपाल ने बताया कि आज हर कोई देशी फ्रिज कहे जाने वाले मिट्टी के मटको के फायदे में जानते है लेकिन उनको खरीददार नही मिल पाते है गांव में मिट्टी पहले तालाबों से मिल जाती थी लेकिन अब तालाब भी गंदे पानी से भरे हुए है या फिर मछली पालन का काम होता है जिससे उनको मिट्टी नही मिलती ईधन भी महंगा हो गया है। नई पीढ़ी इस काम को छोड़ रही है ओर यदि इन मटको पर खर्च की बात कि जाए तो सारा दिन मेहनत करके तीस पीस मटके ही तैयार हो पाते है जिसमें पूरा परिवार का सहयोग होता है ओर एक मटके पर लगभग साठ रूपये खर्च आता है आज से बीस साल पहले मटके का भाव तीस से चालीस रूपये था लेकिन इतनी महंगाई के बाबजूद भी मटके का भाव नब्बे से सौ रूपये तक ही पहुंच पाया है। सोमपाल ने बताया कि मटके के पानी के फायदे तो सभी जानते है लेकिन फिर भी ना जाने क्यों खरीददार कई बार अनुमानित लागत से भी कम पैसे देकर मटका ले जाता है। यदि ऐसा ही चलता रहा तो मटका का पानी ऐतिहास बन जाएगा ओर कुम्हार का चक्क्का बंद हो जाएगा। 

क्या कहते है जिला चिक्तिसा अधिकारी:

जब मटके के पानी को लेकर कुरूक्षेत्र जिला अधिकारी एस.के .नैन से फोन पर बातचीत की गई तो उन्होने विस्तार से बताया कि मटके के बर्तन मिट्टी से बने होने के कारण यह तापमान या मौसम के अनुसार ढाल लेता है , वात नही बढ़ता पेट जल्दी साफ हो जाता है। जहां एक ओर फ्रिज का पानी गले के लिए नुकशान पहुंचाता है वही मटके का पानी गले को ठीक रखता है। इसलिए जहां तक हो सके घरो में मटके के पानी का इस्तेमाल करना चाहिए। 

RAJESH SHARMA