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SANTOSH JHA

नहाय खाय के साथ सुहागिनों  के द्वारा मनाए जाने वाले दो दिवसीय पर्व वट सावित्री आरंभ वही पर्व को लेकर प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न मंदिर स्थानों या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर लगे वटवृक्ष के नीचे साफ सफाई की गई पति की दीर्घायु की कामना करने के लिए सुहागिन स्त्रियों का वट सावित्री पूजा की तैयारी शुरू वट सावित्री पूजा को लेकर बाजार में चहल पहल शुरू ।

आम, लीची एवं पंखे की बिक्री जोरों पर है। सुहागिन स्त्रियाँ पति की दीर्घायु कामना करने के लिए निर्जला रह कर यह व्रत रखती है ।मान्यता है कि बरगद के वृक्ष की आयु सबसे लंबी होने के कारण सुहागिन स्त्रियों पति की लंबी आयु के लिए वट वृक्ष का पूजन करती है। पौराणिक कथा के अनुसार जेष्ठ अमावस के दिन ही सावित्री यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस ले आई थी बरगद वृक्ष की लटकती शाखाओं को सावित्री के रूप का स्वरूप माना जाता है इस व्रत को रखने से वैवाहिक जीवन में आने वाले सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और दांपत्य जीवन में हमेशा सुख शांति बनी रहती है।  हालांकि बाजार में अभी लीची का सीजन नहीं रहने से लीची  पक कर तैयार नहीं हुई है। परंतु प्रचलन के अनुसार पूजा के लिए लीची खरीदी जा रही है जगह जगह लीची एवं पंखे की दुकान सज गई है। बाजार में फलों की महंगाई की वजह से पर्वों का उत्साह फिकी पर  रही है अधिकांश सुहागिनों के द्वारा  नहाय खाय  के साथ 2 दिनों  तक नमक के बिना भोजन किया जाताा है

RAJESH SHARMA