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FIFA: विश्व चैंंपियन जर्मनी को हराकर मेक्सिको ने रचा इतिहास, विश्व कप में पहली बार हुआ ऐसा-INDIA NEWS LIVE

Jun 18, 2018

INDIA NEWS LIVE

21वें फीफा महाकुंभ में स्पेन और अर्जेटीना के बाद गत चैंपियन और विश्व की नंबर वन टीम जर्मनी की भी खराब शुरुआत हुई। दुनिया की 5वें नंबर की टीम मेक्सिको ने रविवार को ग्रुप एफ के मुकाबले में मौजूदा चैंपियन जर्मनी को 1-0 से हराकर मेक्सिको ने टूर्नामेंट का सबसे बड़ा उलटफेर किया। इसी के साथ मेक्सिको की टीम ने इतिहास रच दिया क्योंकि ये मेक्सिको की विश्व कप में जर्मनी के खिलाफ पहली जीत रही।

इससे पहले अकेले क्रिस्टियानो रोनाल्डो के दम पर पुर्तगाल ने सितारों से सजी स्पेन से मैच 3-3 से ड्रॉ खेला था जबकि 33, आबादी वाले देश आइसलैंड ने अर्जेटीना को 1-1 से ड्रॉ पर रोक दिया। के खिलाफ एकमात्र हिरविंग लोजानो (35वें मिनट) ने दागा। मैच जीतने के बाद मेक्सिकन टीम के खिलाड़ी मैदान पर तो प्रशंसक दर्शक दीर्घा में रोते हुए खुशी का इजहार कर रहे थे।मेक्सिको ने पिछले विश्व कप में खेलते हुए अभी तक अपना पहला मैच नहीं गंवाया है। उसने के खिलाफ पहली जीत दर्ज की। मैच की शुरुआत से ही ने दबाव बनाया। डेढ़ मिनट के अंदर ही लोजानो ने अच्छा शॉट मारा जो जर्मन पोस्ट के साइड से निकल गया। तीसरे मिनट में कन्फडरेशन कप में गोल्डन बूट हासिल करने वाले खिलाड़ी वर्नर ने हमला किया लेकिन उनका शॉट भी निशाने पर नहीं लगा।मेक्सिकन टीम ने पहले हाफ में इतने काउंटर अटैक किये कि जर्मन टीम की हालत खराब हो गई। मेक्सिको के तीन मिडफील्डर आंद्रेस ग्वार्दादो, हेक्टर हेरारा, जेवियर हर्नाडेज और फॉरवर्ड हिरविंग लोजानो का मैच में तालमेल देखने लायक था और इन्होंने बायीं तरफ से जर्मन पोस्ट पर हमला किया। 13वें मिनट में जर्मनी के टोनी क्रूस के पास को जोशुआ किमिच ने हेडर से मिस कर दिया।
35वें मिनट में हुआ गोल
पहले हाफ से पहले गेंद के डी में थी लेकिन मोरेनो ने खिलाड़ी को मुस्तैदी से रोका और गेंद हेरारा को दी फिर हेरारा ने लोजानो को पास किया। लोजानो ने डिबलिंग करते हुए जर्मन फुटबॉलर ओजिल को छकाते हुए कर दिया। जर्मनी के अनुभवी कीपर मुंह ताकते रह गए और 1-0 से आगे हो गया। कुछ देर बाद मैच में उतार-चढ़ाव चलता रहा लेकिन 38वें मिनट में जर्मनी के पास वापसी करने का बेहतरीन मौका था। टोनी क्रूस ने डी के बाहर से अच्छा शॉट लगाया और कीपर ने गेंद को फ्लिक कर दिया जिससे गेंद बार पर लगकर बाहर चली गई। जर्मनी ने मेक्सिको पर दबाव डाला और इसी दौरान मैच को धीमा करने के कारण मेक्सिकन फुटबॉलर मोरानो को यलो कार्ड मिला।दूसरे हाफ में कोच की रणनीति के हिसाब से दोनों टीमें अपनी शैली में खेलने लगी। मेक्सिकन मैच को थोड़ा धीमा खेलने लगे और जर्मन गेंद को अपने पास रखने की कोशिश करते हुए छोटे-छोटे पास कर रहे थे। हालांकि मेक्सिकन डिफेंडरों ने उन्हें खुलने नहीं दिया। डिफेंडर हुगो आयला और मोरानो ने उनकी रणनीति को खराब किया। 56वें मिनट में मेक्सिकन टीम ने पुरानी रणनीति के हिसाब से काउंटर अटैक किया। जेवियर हर्नाडेज ने बढ़िया पास अपने साथी खिलाड़ी गुआडरे को दिया लेकिन वह करने में नाकाम रहे। इसके एक मिनट बाद ही मेक्सिकन कोच ने अपनी रणनीति को बदलते हुए वेला को बेंच पर बुलाया और उनकी जगह डिफेंसिव मिडफील्डर एडसन अल्वारेज को मैदान में भेजा।अल्वारेज ने अपनी जिम्मेदारी अच्छी तरह निभाई। 64वें मिनट में जर्मन टीम को गोल करने का मौका मिला लेकिन उसके खिलाड़ी की बाइसिकिल किक काफी धीमी थी इसलिए गेंद कीपर के हाथों में चली गई। 66वें मिनट में जर्मनी के वर्नर को मौका मिला लेकिन वह करने से चूक गए। उसी समय काउंटर अटैक में मेक्सिकन टीम ने अच्छा काम किया। फर्नाडीज ने काउंटर अटैक किया लेकिन कीपर ने उसे बचा लिया।

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देश बदलना है तो देना होगा युवओ को सम्मान-इडिया न्यूज लाइव डाट नेट की एक रिपोर्ट

May 26, 2018

इडिया न्यूज लाइव डाट नेट की एक रिपोर्ट

” भारत एक युवा देश है। इतना ही नहीं ए बल्कि युवाओं के मामले में हम विश्व में सबसे समृद्ध देश हैं। यानि दुनिया के किसी भी देश से ज्यादा युवा हमारे देश में हैं। भारत सरकार की यूथ इन इंडियाए2017 की रिपोर्ट के अनुसार देश में 1971 से 2011 के बीच युवाओं की आबादी में 34.8 की वृद्धि हुई है। बता दिया जाए कि इस रिपोर्ट में 15 से 33 वर्ष तक के लोगों को युवा माना गया है ” इस रिपोर्ट के मुताबिकए 2030 तक एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश चीन में युवाओं की संख्या जहां कुल आबादी की 22.31 होगी और जापान में यह 20.10 होगीए भारत में यह आंकड़ा सबसे अधिक 32.26  होगा। यानी भारत अपने भविष्य के उस सुनहरे दौर के करीब है जहाँ उसकी अर्थव्यवस्था नई ऊँचाईयों को छू सकती है। लेकिन जब हम युवाओं के सहारे देश की अर्थव्यवस्था को आगे ले जाने की बात करते हैं तो इस बात को समझना आवश्यक है किए युवा होना केवल जिंदगी में जवानी का एक दौर नहीं होता जिसे आंकड़ों में शामिल करके गर्व किया जाए। यह महज उम्र की बात नहीं होती। यह विषय उस से कहीं अधिक होता है।
यह विषय होता है असीमित सम्भावनाओं का।
यह विषय होता है सृजनात्मकता का।
यह विषय होता है कल्पनाओं की उड़ान का।
यह विषय होता है उत्सुकता का।
यह विषय होता है उतावलेपन के दौर का।
यह समय होता है ऊर्जा से भरपूर होने का।
यह समय होता है सपनों को देखने और उन्हें पूरा करने का।
यह दौर होता है हिम्मत।
कहा जा सकता है कि युवा या यूथ चिड़िया के उस नन्हे से बच्चे के समान है जो अभी अभी अपने अण्डे को तोड़कर बाहर निकला है और अपने छोटे छोटे पंखों को फैलाकर उम्मीद और आजादी के खुले आकाश में उड़ने को बेकरार है।
यह बात सही है कि किसी भी देश के युवाओं की तरह हमारे देश के युवाओं में भी वो शक्ति है कि वो भारत को एक विकासशील देश से बदलकर एक विकसित देश की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दें।
इस देश से आतंकवाद और दहेज जैसी समस्याओं को जड़ से मिटा दे।
लेकिन जब हम बात करते हैं कि हमारे युवा देश को बदल सकते हैं तो क्या हम यह भी सोचते हैं कि वो कौन सा युवा है जो देश बदलेगा
वो युवा जो रोजगार के लिए दर दर भटक रहा है
वो युवा जिसकी प्रतिभा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती है
वो युवा जो वंशवाद का मुखौटा ओढ़कर स्वयं को एक विकल्प के रूप में प्रस्तुत करता है
वो युवा जो देश में अपनी प्रतिभा को उचित सम्मान न मिलने पर विदेशी कंपनियों में नौकरी कर देश छोड़कर चले जाने के लिए विवश हैं
वो युवा जिसके हाथों में ड्ग्रिियाँ तो हैं लेकिन विषय से संबंधित व्यवहारिक ज्ञान का सर्वथा अभाव है
वे साक्षर तो हैं शिक्षित नहीं
शिक्षित तो छोड़िए संस्कारित भी नहीं
या वो युवा जो कभी तीन माह की तो कभी तीन साल की बच्ची तो कभी निर्भया के बलात्कार में लिप्त है
वो युवा जो आज इंटरनेट और सोशल मीडिया साइट्स की गिरफ्त में हैघ्
या फिर वो युवा जो कालेज कैम्पस में किसी राजनैतिक दल के हाथों का मोहरा भर है
तो फिर कौन सा युवा देश बदलेगा
इसका जवाब यह है कि परिस्थितियां बदलने का इंतजार करने के बजाए हम स्वयं पहल करें।
अगर हम चाहते हैं कि युवा इस देश को बदले तो पहले हमें खुद को बदलना होगा।
हम युवाओं का भविष्य तो नहीं बना सकते लेकिन भविष्य के लिए युवाओं को तैयार तो कर ही सकते हैं।
हमें उन्हें सही मायनों में शिक्षित करना होगा।
उनका ज्ञान जो किताबों के अक्षरों तक सीमित है उसे व्यवहारिक ज्ञान की सीमाओं तक लाना होगा।
उसे वो शिक्षित युवा बनाना होगा जो नौकरी देने वाला उद्यमी बनेए एक एन्टरप्रेन्योर बने न कि नौकरी ढूंढने वाला एक बेरोजगार।
उन्हें शिक्षित ही नहीं संस्कारित भी करना होगा।
उन्हें अपनी जड़ों से जोड़ना होगा।
पैसों से ज्यादा उन पर समय खर्च करना होगा।
उन्हें प्रेम तो हम देते हैं सम्मान भी देना होगा।
हमें उन युवाओं का निर्माण करना होगा जो देश के सहारे खुद आगे जाने के बजाय अपने सहारे देश को आगे ले जाने में यकीन करते हों।
हमें सम्मान करना होगा उस युवा का जो सड़क किनारे किसी बहते हुए नल को देखकर चुपचाप निकल जाने के बजाय उसे बन्द करने की पहल करता है।
हमें आदर करना होगा उस युवा का जो कचरा फेंकने के लिए कूड़ादान ढूँढता है लेकिन सड़क पर कहीं पर भी नहीं फेंक देता।
हमें अभिवादन करना होगा उस युवा का जो भ्रष्टाचार के आगे घुटने टेकने के बजाय लड़ना पसंद करता है।
हमें समादर करना होगा उस युवा का जो दहेज लेने से इंकार कर देता है।
हमें इज्ज़त देनी होगी उस युवा को जो महिलाओं का सम्मान करना जानता हो उनका बलात्कार नहीं।
हमें सत्कार करना होगा उस युवा का जो फूलों का बगीचा लगाने में विश्वास करता है फूल तोड़ने में नहीं।

और यह हर्ष का विषय है कि ऐसे युवा हमारे देश मेंए हमारे समाज मेंएहमारे आसपास हमारे बीच आज भी हैंए बहुत हैं। आज जब हमारा सामना ऐसे किसी युवा से होता है तो हम मन ही मन में उसकी प्रशंसा करते हैं और निकल जाते हैं। अब जरूरत है उन्हें ढूंढने की और सम्मानित करने की। आवश्यकता है ऐसे युवाओं को प्रोत्साहित करने की।एक समाज के रूप मेंए एक संस्था के रूप में  ऐसे युवाओं को जब देश में सम्मान मिलेगाए पहचान मिलेगीए इन्हें शेष युवाओं के सामने यूथ आइकान और रोल मोडल बनाकर प्रस्तुत किया जाएगाए तो न सिर्फ यह इसी राह पर डटे रहने के लिए उत्साहित होंगे बल्कि देश के शेष युवाओं को उन की सोच को एक लक्षय मिलेगा एक दिशा मिलेगी। जब हमारे देश के युवा सही दिशा सही और लक्षय पर चल निकलेंगे तो सही मायनों में यह कहा जा सकता है कि आने वाला कल भारत का ही होगा।
                                                                                                                                                                          डॉ नीलम महेंद्र

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अपने परमाणु परीक्षण केंद्र पुंग्ये.री को नष्ट किया उत्तर कोरिया ने-इडिया न्यूज लाइव डाट नेट की एक रिपोर्ट

May 24, 2018

इडिया न्यूज लाइव डाट नेट की एक रिपोर्ट-उत्तर कोरिया ने परमाणु निशस्त्रीकरण की ओर कदम बढ़ाते हुए आज देश के मध्य पुंग्ये.री परमाणु परीक्षण स्थल को नष्ट कर दिया। उत्तर कोरिया ने हाल में वादा किया था कि वह विदेशी मीडिया के सामने पुंग्ये.री परीक्षण स्थल को उड़ा देगा। यहां प्योंगयांग ने कई सुरंगों का निर्माण किया है। पुंग्ये.री देश के उत्तरपूर्वी हिस्से में स्थित है और वहीं उत्तर कोरिया के सभी छह परमाणु परीक्षण हुए थे। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग.उन के साथ 12 जून को सिंगापुर में होने वाली शिखर वार्ता पर निर्णय अगले सप्ताह लिया जाएगा। ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से कहाए श्श्सिंगापुर के बारे में हमें अगले सप्ताह पता चलेगाए और अगर हम जाते हैं तो मुझे लगता है कि उत्तर कोरिया के लिए यह एक बड़ी बात होगी।  इससे पहले अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने सांसदों से कहा था कि 12 जून की शिखर वार्ता होगी। ट्रंप ने भी दोनों देशों के बीच जारी तनाव के बावजूद शिखर वार्ता होने के संकेत दिए थे। ट्रंप ने कहाए श्श्हम देखेंगे की क्या होता है। सिंगापुर परए हम देखेंगे की क्या होता है। और यह ;शिखर वार्ताद्ध हो सकती है। यह बहुत अच्छा हो सकता है। लेकिन जो है वह है।  इन अनिश्चिताओं के बावजूद व्हाइट हाउस शिखर वार्ता की तैयारियां कर रहा है। इस बीचए एएफपी की खबर के अनुसार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद समिति ट्रंप.किम की शिखर वार्ता के लिए सिंगापुर जाने वाले उत्तर कोरियाई अधिकारियों पर यात्रा प्रतिबंध हटाने को तैयार हो गई है। सिंगापुर ने 12 जून की शिखर वार्ता की तैयारियों के लिए होने वाली बैठकों के लिए उत्तर कोरियाई प्रतिनिधिमंडल को छूट देने का अनुरोध प्रतिबंध समिति से किया था। समिति में सिंगापुर के संयुक्त राष्ट्र राजदूत बुरहान गफूर ने कहाए श्श्यह शिखर वार्ता डीपीआरके के परमाणु मुद्दे के शांतिपूर्ण निपटान और कोरियाई प्रायद्वीप तथा क्षेत्र में शांति स्थापित करने के उद्देश्य को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करेगी।

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पटना:- हमें हमारी एक दूसरे को नीचा दिखाने की सोंच से बाहर आना होगा, हमें पत्रकारों की सहायता हेतू आगे आना होगा:- राकेश कुमार गुप्ता

May 19, 2018

सी.के.झाकी एक रिपोर्ट ।

पटना:- हम अपने कर्तव्यों के प्रति आखिर इतने उदासीन क्यों हैं ? कहीं हम झुठे अहंकार के शिकार तो नही हैं ? ये प्रश्न भी वाहे बगाहे मेरे मन में कौंधता है । आखिर हम पलासी युध्द के मूकदर्शक छवि की भूमिका में क्यों हैं? हम अपने लोगों की सहायता में योगदान देने से कतराते क्यों हैं ? क्या हमारी दृढ इच्छा शक्ति का क्षरण हो चुका है ? ये बहुत से सवाल हमारे सामने खड़े हैं।हमें हर हाल में इन प्रश्नों के उत्तर ढूंढ़ने होंगे । हमें हमारी एक दूसरे को नीचा दिखाने की सोंच से बाहर आना होगा ।

उक्त बातें नेशनल जर्नलिस्ट एसोसियेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश कुमार गुप्ता ने कही। उन्होंने कहा कि चरित्र रावण का भी था कि अपने अहंकार में अपने बंधु-बांधवों को बलि बेदी पे चढ़ा कर खुद भी मौत की आगोश में चला गया।चरित्र पांडवों का भी था कि एक दूसरे के प्रति समर्पित रह कर कम संख्या रहते हुए भी विजयी रहा।राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश कुमार गुप्ता ने कहा कि बिहार में पत्रकार सुरक्षा कानून को लेकर एक अभियान चलाया जा रहा है।संगठन ने निर्णय लिया है कि बिहार में एक राष्ट्रीय अधिवेशन हो और हम अपनी मांग बिहार सरकार के सामने रखें । “नेशनल जर्नलिस्ट एसोसियेशन ”पत्रकारों को स्वतंत्रता से कार्य करने का संपुर्ण भरोसा दिलाता है । चाहे आप किसी भी संगठन अथवा गैर संगठनवादी हो, झिझकने की आवश्यकता बिल्कुल नहीं है । आप स्वतंत्र हैं ,यहाँ नि:शुल्क नाम पंजीकृत करवाने के लिए ।क्योंकि हमारा मकसद है एक ही छत्रछाया हो पत्रकारिता जगत की ,जिससे कोई बाल बांका ना कर सके ,कोई शोषण ना कर सके , हमारे जांबाज पत्रकार योद्धाओं का। बिहार हो या उत्तर प्रदेश या फिर दिल्ली।हमारा संगठन दिल खोल कर पीड़ित पत्रकार को न्याय दिलाने का काम किया है। श्री गुप्ता ने कहा कि हमारे संगठन का उद्देश्य पत्रकारों के हितार्थ-सुरक्षार्थ पत्रकार सुरक्षा कानून बनवाना है। जिससे हमारा पत्रकार परिवार पूर्ण रूप से सुरक्षित रहें एवम् स्वतन्त्र अभिव्यक्ति में किसी प्रकार की बाधा ना आये।

राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश कुमार गुप्ता ने कहा कि प्रताड़ित पत्रकारों की आवाज हम बुलन्द कर रहे हैं और करते रहेंगे। कार्यवाही हेतु मुख्यमंत्री,डीजीपी डीआईजी,आईजी,सांसद तक को संगठन के स्तर से पत्र लिखकर उन्हें न्याय दिलाया जा रहा है। हम लगातार अपने संगठन की ओर से पत्रकारों की आवाज बन कर उभर रहे हैं। मधेपुरा के उदय कुमार,गौरव ठाकुर, खगड़िया के राजेश कुमार सिन्हा, पूर्णिया के मनोज कुमार मिश्रा, कटिहार के भाई संजीव गुप्ता,यूपी के रमेश ठाकुर, रायबरेली के मनीष शुक्ल,मुंगेर के कई मित्रों के साथ स्थानीय प्रशासन,दबंगो द्वारा प्रताड़ित किया गया।जिसका हमारी संगठन ने विरोध दर्ज कर धरना प्रदर्शन किया। लगातार अपनी आवाज को बुलंद की और पत्रकार बंधुओं को न्याय दिलाया गया।

नेशनल जर्नलिस्ट एसोसियेशन के राष्ट्रीय महासचिव संजय कुमार सुमन ने कहा कि आए दिन पत्रकारों पे अपराधियों के द्वारा हमले हो रहे हैं तो कहीं प्रसाशन के द्वारा पत्रकारों के कलम को रोकने के लिए फर्जी मुकद्दमे किए जा रहें हैं।देश में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू हो नेशनल जर्नलिस्ट एसोसियेशन ने समस्त भारत में अभियान छेड़ा है। आज हम सब इस सच्चाई से भली भांति परिचित हैं कि शासन -प्रशासन में बैठे लोग पत्रकारों के साथ किस तरह के व्यवहार कर रहे हैं ।अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि आए दिन कोई न कोई पत्रकार उनका शिकार हो रहा है। राष्ट्रीय महासचिव श्रीसुमन ने कहा कि देश मे हो रही पत्रकारों की हत्याएं और पत्रकार उत्पीड़न को देखते हुए हमने और हमारे साथियो के साथ इस संगठन की नींव रखी थीं, जिसको पुरे देश से भरपूर समर्थन मिल रहा है। आज एक बड़ी ताकत के रूप में हमारी पहचान बन गई हैं। हमारी लड़ाई सिर्फ पत्रकारों को सुविधा दिलाने के लिए नहीं हैं बल्कि हम पत्रकारों का मनोबल बढाकर उसके सम्मान और सुरक्षा के लिए एक आंदोलन के रूप में खड़े हुए हैं और इनके पीछे हमारी मंशा लोकतंत्र को सुदृढ़ बनाकर देश को ओर मजबूती प्रदान करने की हैं।श्री सुमन ने कहा कि आज के दौर में जब पत्रकारिता कॉर्पोरेट की दासी बनकर रह गई है। उनको हम फिर भारत माता की सरताज बनाना चाहते हैं। एक पत्रकार ही हैं जो अपने कर्तव्यों का वहन करते हुए इस राष्ट्र को उन्नत बना सकता हैं। हमें फिर से आज़ादी के दौर वाले भगत सिंह और गांधीजी जैसे पत्रकारों को इस पवित्र धरती पर पैदा करना हैं।

आज की सरकाऱे पत्रकारों की आज़ादी की पक्षघर नहीं है इसलिए हमें उनसे संघर्ष करके हमारा अधिकार प्राप्त करना पड़ेगा।

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पटना:- सवर्णों के आरक्षण के लिए आगे आए केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान, बोले गरीब सवर्णो को भी आरक्षण मिले

Apr 14, 2018

सी.के.झा की एक रिपोर्ट ।

पटना:-एलजेपी प्रमुख और केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि हम चाहते हैं कि गरीब सवर्णो को भी 10 या 12 प्रतिशत आरक्षण मिले। न्यायपालिका में आरक्षण जरूरी है ये बातें दलित सेना के राष्ट्रीय सम्मेलन में शनिवार को पासवान ने कहा । श्री पासवान ने कहा कि यूपी सीएम रहते मायावती ने एससी-एसटी एक्ट को शिथिल करने का जो आदेश निकाला था, उसके लिए उन्हें दलितों से माफी मांगनी चाहिए। हमारी सरकार सांप्रदायिकता को बर्दाश्त करने वाली नहीं है। दलित सेना के राष्ट्रीय सम्मेलन में शनिवार को पासवान ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तो दलितों के लिए जितना कर दिया उतना सात जन्म में कोई नहीं कर सकता। मांझी को कहां से कहां तक पहुंचा दिया।कांग्रेस बताये कि अपने शासनकाल में उसने दलितों के लिए क्या किया। एससीएसटी एक्ट भी वीपी सिंह की देन है। नरेन्द्र मोदी ने उसे मजबूत किया। पहले 22 अत्याचार उसके तहत आते थे, मोदी ने बढ़ाकर 47 अत्याचारों को शामिल किया। बिहार में निचली अदालतों में नीतीश कुमार ने आरक्षण की व्यवस्था कर दी है। लेकिन जब तक हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में यह व्यवस्था नहीं होगी। दलितों के हक के खिलाफ फैसले आते रहेंगे। उन्होंनें यह भी कहा कि राजद में हिम्मत है तो तेजस्वी यादव को छोड़कर जीतन राम मांझी को सीएम उम्मीदवार घोषित करे।

आरक्षण पर बहस एक साजिश—
केन्द्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा ने कहा कि आरक्षण पर बहस एक साजिश के तहत की जा रही है। ऐसा करने वाले चाहते हैं कि पिछड़े और दलित इसी में उलझ कर रह जाएं । लोग कहने लगे हैं कि आरक्षण छीन लेंगे। हम कहते हैं कि अभी और लेंगे। उन्होंने कहा कि चाय बेचने वाला पीएम हो सकता है लेकिन वर्तमान व्यवस्था में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जज नहीं हो सकता। हम कोर्ट से आग्रह कर रहे हैं कि ऐसी व्यवस्था करे कि दलित, पिछड़े और गरीब भी वहां पहुंचे। राष्ट्रपति ने भी चिंता जताते हुए कहा है कि न्यायपालिका में महिलाएं 25 प्रतिशत भी नहीं हैं। दलित तो शायद ही अब तक कोई हुआ हो।

दलितों को हक के लिए अब भी संघर्ष करना पड़ रहा है किनके कारण

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लोजपा संसदीय बोर्ड के चेयरमैन चिराग पासवान ने कहा कि अब तक देश पर शासन करने वालों ने क्या किया । आजादी के इतने दिनों बाद भी दलितों को हक के लिए संघर्ष की जरूरत पड़ती है तो यह तय करना होगा कि इसके पीछे कौन हैं। मेरे रहते आरक्षण पर आंच भी नहीं आ सकती। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने आंबेडकर से जुड़े सभी स्थलों को स्मारक घोषित कर उनका विकास किया है ।

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आखिरकार लोकतंत्र सेनानी चौधरी इरशाद अहमद गद्दी की मेहनत ले ही आयी,प्रशासन झुका ,पिपरा पुल का निर्माण कार्य शुरू -SUSHIL SRIVASTVA सुशील श्रीवास्तव की एक रिर्पोट ,उतरौला

Mar 31, 2018

सुशील श्रीवास्तव की एक रिर्पोट ,उतरौला

उतरौला (बलरामपुर)आखिरकार लोकतंत्र सेनानी चौधरी इरशाद अहमद गद्दी की मेहनत ले ही आयी।प्रशासन झुका और उतरौला से तुलसीपुर को जोड़ने वाली पिपरा पुल का निर्माण कार्य शुरू हो गया ।उन्होंने क्षेत्र के विकास कार्यों को लेकर आमरण अनशन,धरना प्रदर्शन व ज्ञापन के माध्यम से शासन को मांगे मनवाने पर मजबूर कर दिया। 
पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के शासन काल मे राप्ती नदी पर पिपराघाट पुल का निर्माण कार्य का उद्घघाटन हुआ था और कुछ भाग निर्माण होने के बाद निर्माण कार्य रूक गया। वर्षों से बंद पड़ें पिपरा घाट पुल के निर्माण कार्य व सड़क निर्माण को लेकर लोकतंत्र सेनानी चौधरी इरशाद ने ग्यारह मार्च 2018 को धरना प्रदर्शन चक्का जाम करके शासन प्रशासन जगाने का काम किया।जिसके फलस्वरूप शासन ने संज्ञान लेते हुए अधूरे पड़े पुल व सड़क निर्माण के लिए लगभग 28करोड़ का धनराशि निर्गत कर निर्माण कार्य शुरू कराया। क्षेत्र वासी संतोष कुमार श्रवण,अमित कुमार यादव,धर्मेन्द्र कुमार गुप्त,दिनेश कुमार विमल,आशीष कुमार यादव, आदि ने उम्मीद जताया है कि आगामी नवरात्रि पर मां पाटेश्वरी देवी मंदिर के दर्शन करने वाले श्रद्धालुओ को कम खर्च व कम समय में दर्शन करने की कामना पूरी होगी।

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पटना:-भागलपुर जिला में संचालित गरिमा रियल इस्टेट एंड एलाइड लिमिटेड करोड़ों लेकर मार्केट से फरार, सीजेएम कोर्ट में मामला दर्ज

Mar 28, 2018

सी.के.झा की एक रिपोर्ट ।

पटना:-भागलपुर जिला में संचालित गरिमा रियल इस्टेट एंड एलाइड लिमिटेड एवं गरिमा होम्स एंड फर्म के कार्यालय से संबंधित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है । बता दें कि मामला करोड़ों रुपए लेकर गरिमा का चंपत हो जाने का  है । गरिमा रियल इस्टेट एंड एलाइड लिमिटेड एवं गरिमा होम्स एंड फार्म में लाखों करोड़ों रुपए का मामला निवेशकों से जुड़ा है जो मिलना गर्भ में दिखाई दे रहा है । गरिमा पर  पैसा वापसी नहीं होने के कारण कुछ निवेशक सीजेएम कोर्ट भागलपुर की शरण में जाना उचित समझा ।

मामला 2016 से भागलपुर सीजेएम कोर्ट में-

श्री चंद्रानन झा ने परिवाद पत्र दायर 2016 में ही किया है जो मामला गतिशील है । यह मामला श्री चंद्रानंद झा ने गरिमा  द्वारा गबन किए गए करोड़ों रुपए को लेकर दायर किया है जो 2016 में अक्तूवर  का है जिसका केस नंबर 1641/16 के तहत कार्यवाही जारी  है । जानकारी के अनुसार यह केस 19.10. 2016 को दायर किया गया है । जबकि मिली जानकारी से भागलपुर में इसकी शाखा मई 2010 से ही संचालित बताई जाती है एवं बिहार में पटना,हाजीपुर व भागलपुर तीन शाखा ही इनके खुले थे जो वर्तमान समय में सभी बंद है ।

मामला निवेशकों का 12:50 करोड़ का–  

मुकदमा में रियल इस्टेट एण्ड एलाइड लिमिटेड व गरिमा होम्स एंड फार्म के बनवारी लाल कुशवाहा ,शिवराम कुशवाहा , कन्हैया लाल कुशवाहा, बालकिशन कुशवाहा, शोभारानी कुशवाहा , राजेंद्र राजपूत, भीम सिंह कुशवाहा, लज्जाराम कुशवाहा आदि पर किया गया परिवाद में आवेदक ने निवेशकों का 12:50 करोड़ का पेमेंट नहीं करने व तत्काल धोखाधड़ी व गमण का आरोप लगाया है ।  जिसमें श्री झा ने साक्ष्य  सहित कोर्ट में परिवाद दायर किया है । श्री चंद्रानन झा  ने आवेदन में अपने परिवार के भी 4000000 (चालीस लाख) रुपए का निवेश हुआ बताया है । उन्होने केश दायर कर कहा है गरिमा रियल इस्टेट कार्यालय 2015 तक भागलपुर के मनाली चौक स्थित यामहा  शोरुम में चौथवीं फ्लोर पर चल रहा था जो कि 2015 से ही बंद पडा है और शाखा बंद कर कंपनी फरार है ।

गरिमा  का रजिस्ट्रेशन व मुख्य कार्यालय–

गरिमा  का रजिस्ट्रेशन न0-19955,  रजिस्टर्ड कार्यालय- 403 सौरव प्लाजा गोल का मंदिर ,नजदीक सुरुचि होटल ,ग्वालियर (MP) है तथा कारपोरेट कार्यालय- 459 पटपड़गंज इंडस्ट्रियल एरिया दिल्ली 93 फोन नंबर +91114735468, 4735582 जो निवेशक के एग्रीमेंट में निहित है । इसमें यह भी बताया गया है कि उस समय इस कार्यालय के शाखा प्रबंधक गौरी शंकर झा जो दरभंगा के थे के देखरेख में कार्य संपादन एग्रीमेंट देने व रसीद देने का कार्य होता रहा था । इनके बाद शाखा का कार्यभार प्रबंधक  मनोज कुमार पटना निवासी ने संभाल रखा था । मिली जानकारी से 2015 तक मनोज ने ही शाखा का वर्तमान कार्य प्रभारी रहे । इन  दिनों शाखा से कुछ प्लान का कुछ निवेशकों का मैच्योरिटी भी प्राप्त हुआ था । इसके बाद और मैच्योरिटी करने से पहले ही गरिमा का कार्यालय बन्द हो गया । इसी मैच्योरिटी को लेकर अशोक चौधरी,राजेश चौरसिया,अमन खान के साथ आवेदक चंद्रानन झा भी दिल्ली मुख्यालय में कंपनी के प्रबंधन से कई बार मिलने भी गए लेकिन कार्य सिफर रहा । श्री झा ने कहा कि हमलोगों के मुख्यालय में प्रबंधन के साथ 2-3 मुलाकात के बाद  प्रबंधन द्वारा 5200000 (बाबन लाख) का चेक भी  दिया गया , जिसे निवेशक के बेंकों में अपने खाता में डालने के बाद बाॅन्स हो गया। मिली जानकारी के अनुसार बालकिशन  कुशवाहा धौलपुर राजस्थान से बसपा के विधायक भी रहे हैं जो अभी हत्या के मामले में जेल में हैं । बतादें कि उपरोक्त आरोपियों में से शोभारानी कुशवाहा भी अभी वर्तमान में बीजेपी की विधायक हैं । श्री झा का कहना है कि इस प्रकार के कम्पनी के संचालक राजनीतिक जीवन से जुड़कर अपने को निवेशकों से बचने का रास्ता ढूंढकर चंपत होने से बाज तक नहीं आते । इनका कहना है कि ये लोग  इसी राजनीति के पहुँच के बदौलत निवेशकों के चंगुल से निकल कानून को धता बताने से भी नहीं चूकते । जरूरत है सरकार व कानून के सिपाहियों से ऐसे लोगों से निवेशकों को कानूनन न्याय दिलवाने की ।

परिवाद में गवाह—

इस प्रकरण में साक्षी के रूप में अशोक चौधरी,राजेश कुमार चौरसिया, मो0 अमन खान,मो0 फकरूद्दीन उर्फ फेकू ,कैलाश शर्मा आदि का नाम वर्णित है । जिसमें कुछ का गवाही व बयां भी लिखित रूप से कोर्ट ने लिया है ।

गरिमा रियल इस्टेट एण्ड एलाइड लिमिटेड  व गरिमा होम्स एंड फर्म में  लगभग 125000000 (साढे बारह करोड़) लाख रुपये का मामला  निवेशकों से जुड़ा है ।

कोर्ट ने लगाया सुसंगत धारा—-

इस मामले में कोर्ट ने मुख्य रूप से धारा 406 ,420 467, 468, 476, 120 बी /34 भा0स0वि0 के अंतर्गत प्रथम दृष्टया दर्ज कर कार्यवाही शुरू कर आरोपियों को नोटिस भी किया है ।

लगभग आधा दर्जन जिले के निवेश डूबे–

हजारों निवेशकों का भागलपुर जिले में उस समय स्थित इस कार्यालय में लगभग आधा दर्जन जिलों से जमा करोड़ों का निवेश हुआ था  जिसमें भागलपुर,कटिहार, पूर्णिया, सहरसा ,मधेपुरा, खगड़िया आदि जिले का निवेशक है ।

निवेशकों की मांग निवेश की रकम वापस हो-

निवेशकों की मांग है कि हम लोगों का  जल्द से जल्द सरकार निवेश किये रूपये वापस दिलवाने हेतू सहयोग करें ।

निवेशक अशोक चौधरी, राजेश कुमार चौरसिया,  मोहम्मद अमन खान, मोहम्मद फखरुद्दीन उर्दू फेकू, राजीव रंजन ठाकुर, पवन कुमार ,वीरेंद्र कुमार ,अमन आर्या, मो0 नियामत आलम ,रीना झा ,राजकिशोर कुंवर, सिंटु ठाकुर,विजय कुमार झा, देवेंद्र कुमार सिंह ,घोलट झा, अमोद कुमार झा ,चंदन कुमार झा आदि ने प्रशासन से मांग की है कि हजारों निवेशकों का जमा धन वापस करने की पहल में सरकार व प्रशासन सहयोग करें जिससे कड़ोड़ों निवेश  किये गये पैसे को वापस दिलवाये जाने में मदद मिल सके ।

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पटना:-सम्पादकीय:-(पत्रकारिता विशेष) इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में स्मार्टफोन के दम पर तीसरी आजादी की ओर चौथा स्तंभ

Mar 20, 2018

सी.के.झा की कलम से एक रिपोर्ट ।

                     सम्पादकीय

                 (पत्रकारिता विशेष)

पटना:- इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में स्मार्ट फोन के दम पर पत्रकारिता तीसरी आजादी की ओर तेजी से बढ़ रही है हालांकि यह बदलाव प्रिंट मीडिया के लिए परेशानी का कारण जरूर है लेकिन तकनीकें बदलती है तो तकदीरें भी बदलती ही हैं. कभी अखबार ट्रेडल पर छपा करते थे, फिर  सिलेंडर आफसेट मशीन पर आ गए तो ब्लैक एंड व्हाईट, फोटो ब्लॉक से सेपरेट कलर से लेकर मिक्स कलर तक का सफर ऐसे ही तय नही किया है. प्रिंट मीडिया में इन बदलावों के दौरान भी कई बेरोजगार हुए तो कइयों का कैरियर खत्म हो गया. जब कंप्यूटर युग शुरू हुआ तो कई वरिष्ठ पत्रकार, पत्रकारिता की मुख्यधारा से ही अलग हो गए. 

करवट लेते तकनीक में हुंकार भरा  पत्रकारिता —

अब तकनीक फिर करवट ले रही है. यह अच्छे पत्रकारों के लिए यकीनन एक सुखद बदलाव है. क्योंकि यह पत्रकारिता को तीसरी आजादी की ओर ले जा रही है. बीसवीं सदी के पूर्वार्ध में पत्रकारिता का उदय हुआ तथा आजादी से पहले और बाद में कई अखबार निकले जो कॉर्पोरेट आधार पर नहीं, कलम के आधार पर जाने-पहचाने जाते थे.

अखबारों का संघर्ष व उनकी तस्वीर पर एक नजर—

आजादी से पहले इन अखबारों ने बड़ा संघर्ष किया क्योंकि अंग्रेजों ने कई नियम लाद रखे थे, दुर्भाग्य से आज भी प्रेस एक्ट उसी जमाने के नियमों की सजावटी फोटोकॉपी है. उस युग की तस्वीर की कल्पना केवल इससे की जा सकती है कि आजाद बांसवाड़ा के पहले प्रधानमंत्री प्रसिद्ध पत्रकार भूपेन्द्रनाथ त्रिवेदी को अखबार पढ़ने के जुर्म में सजा दी गई थी. देश आजाद हुआ तो पत्रकारिता को पहली आजादी मिली. आजादी के बाद के तीन दशक पत्रकारिता का स्वर्णयुग था. लेकिन इसके बाद सातवें दशक में आपातकाल ने एक बार फिर पत्रकारिता को गुलाम बना लिया. अखबारों की स्थिति सरकारी प्रेसनोट जैसी हो गई लेकिन समय बदला और पत्रकारिता को दूसरी आजादी मिली.

कलम की ताकत से पत्रकार की पहचान तक का सफर–

इंडियन एक्सप्रेस, जनसत्ता, नवभारत टाइम्स जैसे अखबारों ने एक बार फिर कलम की ताकत दुनिया को दिखाई लेकिन आठवें दशक के बाद जाने-अनजाने पत्रकारिता फिर कमजोर पडने लगी. एक ओर जहां सरकारी लाभ के घोषित/अघोषित नियमों ने अच्छे-अच्छे अखबारों को फाइल कॉपी तक पहुंचा दिया वहीं बाजार के दबाव में बड़े-बड़े अखबार सजावटी होते चले गए. कलम की ताकत से पहचाने जानेवाले पत्रकार की पहचान बड़ी कार हो गई. 

इंटरनेट की बढ़ती ताकत पत्रकारिता तेजी से तीसरी आजादी की ओर—-

इस दौरान इलैक्ट्रॉनिक मीडिया भी आया लेकिन उसके भी भारी भरकम खर्चे बाजार पर ही निर्भर रहे इसलिए वहां भी पत्रकारिता सजावटी ही बनी रही. कभी कलम पत्रकारों की तलवार होती थी लेकिन नई एक्कीसवीं सदी में तलवार की जगह म्यांन थमा दी गई. चाहे जितना लड़ो, चाहे जितना लिखो. नुकसान कुछ नहीं होना है, नतीजा कुछ नहीं निकलना है. लेकिन अब स्मार्ट फोन और इंटरनेट की बढ़ती ताकत पत्रकारिता को तेजी से तीसरी आजादी की ओर ले जा रही है. इस बीच कई सवाल खड़े हो गए हैं कि इसका व्यावसायिक ढांचा क्या है? फायदा क्या है? यकीनन प्रिंट और इलैक्ट्रानिक मीडिया के करोड़ों की कमाई के मुकाबले इसकी कुछ भी कमाई नहीं है लेकिन सवाल यह है कि पत्रकारिता व्यवसाय कब थी? इसे तो व्यवसाय बना दिया गया है.

हां, जहां तक इसकी ताकत की बात है तो आनेवाला समय दिखाएगा कि अच्छे पत्रकारों की कलम में फिर जान आ रही है. पत्रकारिता का स्वर्णयुग लौट रहा है.

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