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उतरौला : बैंकों में कैश नही,एटीएम मशीनें कैशलेश फिर भी फ्रेंचाइजी से हो रहे भुगतान के लिये पैसा कहां से ? -SUSHIL SRIVASTVA सुशील श्रीवास्तव की एक रिर्पोट ,उतरौला

Apr 20, 2018

सुशील श्रीवास्तव की एक रिर्पोट

उतरौला- नगर मे लगे एटीएम अक्सर बंद रहते हैं । कई बैंको के बाहर कैश नहीं है का नोटिस चस्पा है ।ग्राहक बोर्ड देखकर वापस लौट रहे हैं।वहीं दूसरी ओर फ्रेंचाइजी व स्वेप मशीन द्वारा भारी कमीशन लेकर धड़ल्ले से भुगतान किया जा रहा है।

       गेहूँ फसल की कटाई,मड़ाई  व शादी विवाह का मौसम होने के कारण किसानों व  ग्राहकों को पैसे की सख्त जरूरत पड़ती है ऐसे मे पैसा न मिलने पर  उनकी परेशानियां और बढ गई है। खाता धारक अंकित श्रीवास्तव कहते है कि सहालग के चलते पैसे की अधिक आवश्यकता पड़ती है और बैंक से पैसा नहीं मिल पा रहा है ये तो नोट बंदी के दिनों की याद ताजा करा दिया है। आसिफ कहते है कि बड़ी आश्चर्य की बात है कि बैंको में पैसे की किल्लत से खाताधारको को पैसा नहीं मिल पा रहा है वहीं स्वेप मशीन द्वारा भुगतान करने वाले प्राइवेट दुकानों पर एक हजार की निकासी पर तीस से चालीस रूपये लेकर धड़ल्ले से भुगतान किया जा रहा है यह सोचने वाली विषय है कि उनके पास पैसा कहां से आता है ।लोकतंत्र सेनानी चौधरी इरशाद अहमद गद्दी कहते है कि अचानक कैश की कमी ने लोगों को मुसीबत में डाल दिया है इस समय गेहूँ की कटाई व मड़ाई कराने के लिए लोगों को पैसे की सख्त जरूरत है  और बैंक में पैसा ही नहीं है ऐसे मे मजबूर होकर लोग भारी कमीशन देकर प्राइवेट दुकानों के स्वेप मशीन से पैसा लेकर काम चला रहे हैं । मोहल्ला गांधी नगर निवासी नसीरूद्दीन उर्फ नसीर बताते है कि नगर मे लगे एटीएम पर पैसा न होने के कारण अक्सर बंद रहते हैं  और बैंकों मे पैसा न होने  की बात कहकर ग्राहकों को वापस किया  जा रहा है  ऐसे मे लोगों को काफी दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है लोग सुबह से बैंकों के सामने लाइन लगा कर खड़े रहते हैं फिर भी उन्हें खाली हाथ बैंरग लौटना पड़ता है ।

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सुपौल के लिए ए टी एम  से रुपए निकालना बना नदारत -ARUN KUMAR JHA

Apr 17, 2018

अरुण कुमार झा 

सुपौल –त्रिवेणीगंज मुख्यालय स्थित  एटीएम के इन दिनों काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्र की बात तो अलग अनुमंडल क्षेत्रों के एटीएम का भी हाल बहुत बुरा है। इन दिनों एटीएम से पैसा निकालने के लिए लोगों को सुबह से ही उन एटीएम की तलाश करनी पड़ती है, जहां पैसे मिलने की संभावनाएं हों। वही लाईन मे खड़े त्रिलोक कुमार, मौसम कुमार, मोहम्मद जाकिर बताते है कि इससे पूर्व मे भी त्रिवेणीगंज के सभी एटीएम का चक्कर लगाने के बाद ईस एटीएम के लाईन मे लगने के बाद भी राशि प्राप्ति होगी या नही इसकी चिंता बनी है क्योंकि इससे पहले और आज बस स्टैंड स्थित स्टेट बैंक  एटीएम में कतार में लगा हूं लेकिन उम्मीद नहीं है कि मुझे आज भी राशि प्राप्त हो पाएगा।

चूंकि पूर्व में भी कई बार कतार में खड़े होने के बावजूद भी जब भी मेरा नंबर आता था उससे पहले मशीन में कैश खत्म हो जाता था।जानकारी के अनुसार अनुमंडल क्षेत्र में विभिन्न बैंकों के दर्जनो भर  एटीएम अवस्थित हैं। परंतु, इनमें ज्यादातर एटीएम विगत एक-डेढ़ माह से बेकार पड़े हैं। कुछ एटीएम तो पूर्णरूप से बंद कर दिए गए हैं। जबकि कुछ एटीएम में नाम मात्र के पैसे डाले जा रहे हैं। जिसके कारण उपभोक्ताओं को भारी फजीहत का सामना करना पड़ रहा है। इस संबंध में जब कोई उपभोक्ता बैंक अधिकारी से बात करने की कोशिश करते हैं तो अधिकारी कन्नी काट लेते हैं। परंतु, इन दिनों एटीएम की स्थिति बहुत ही दयनीय हो गई है। , स्टेट बैंक के एटीएम के पास इतनी लंबी लाइन लगी है कि वह एटीएम से सड़क तक पहुंची हुई है। भीड़ में लोग पसीने से तर-बतर हैं। परंतु, इस डर से लाइन से नहीं हट रहे हैं कि कहीं कोई दूसरा न लाइन में लग जाए। बैंक अधिकारी रिपोर्टरों के प्रश्न पर सिर्फ इतना कहते हैं कि कैश की किल्लत है, मार्केट से जो कैश बैंक को उपलब्ध हो रहा है, उसी में से कुछ रुपये काउंटर पर और कुछ एटीएम में डाले जा रहे हैं।

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आलमनगर : बैंकों में कैश की किल्लत से शादी विवाह कर रहे घरों के लोग खासे परेशान-SANTOSH JHA

Apr 17, 2018

SANTOSH JHA

आलमनगर-बैंकों में कैश की किल्लत से लोग भारी परेशानियों से गुजर रहे हैं। खासकर शादी ब्याह के इस सीजन में केश की किल्लत से शादी विवाह कर रहे घरों के लोग खासे परेशान हैं ।प्रखंड क्षेत्र स्थित 5 बैंकों में जहां कैश की किल्लत से लोगों का पैसा नहीं मिल रहा है  ए टी एम में ताला बंद है  प्रखंड मुख्यालय स्थित भारतीय स्टेट बैंक सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया एवं ग्रामीण बैंक मैं लोगों की लंबी कतारें लगी हुई है लोग अपने खाते से पैसे निकालने के लिए परेशान हैं  ।

बैंकों द्वारा  ग्राहकों के द्वारा जमा किए गए पैसे से ही किसी तरह लोगों को  जहां एक लाख की जगह वहां पाँच -दस हजार देकर किसी तरह काम चलाने की बात कही जा रही है  अपनी बिटिया की शादी कर रहे आलमनगर दक्षिणी पंचायत निवासी मणिकांत झा ने बताया कि पिछले 5 दिनों से बैंकों का चक्कर लगा रहे हैं परंतु मांग के अनुसार रुपया नहीं देने से  धूमधाम से शादी करने की अभिलाषा बैंकों के द्वारा पैसे नहीं देने से धरी की धरी रह जाएगी उन्होंने बताया कि एक तरफ शादी ब्याह की तैयारी करनी है खरीदारी करनी है वही  बैंकों का चक्कर लगा लगा कर थक चुका हूं बैंक में रुपया जमा रहने के बावजूद हमें नहीं मिल पा रहा है वही गल्ला व्यवसाई महेश गुप्ता ने बताया कि किसानों के द्वारा तैयार किए गए गेहूं की खरीददारी कैश नहीं रहने से नहीं कर पा रहा हूं क्योंकि पिछले 1 सप्ताह से बैंकों द्वारा केस सही ढंग से नहीं दिया जा रहा है बैंकों में कैश की किल्लत का असर शादी विवाह के साथ साथ किसानों पर भी पड़ रही है किसान अपने गेहूं को नहीं बेच पा रहे हैं

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सुपौल  : परिवहन विभाग कि लापरवाही के चलते हो रहा है दुर्घटना सिर्फ इन्हे लूट का द्वारा बनकर रह गया -अरुण कुमार झा 

Apr 15, 2018

अरुण कुमार झा 

 डिवाइडर का अवलोकन किया गया। इस दौरान उनके द्वारा  दिया गया कि रोड डिवाइडर का गुणवत्तापूर्ण ढंग से निर्माण किया जाय एवं डिवाइडर के बीचों-बीच फूल लगाकर सड़क का सौंदर्यीकरण किया जाय। इस संबंध में उनके द्वारा संबंधित विभाग को निदेश दिया गया कि डिवाइडर के बीच में मिट्टी का भराव कर उसमें सजावटी फूल-पत्ती लगाया जाए; ताकि सड़कों के  सौंदर्यीकरण के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन में भी मदद हो सके।

साथ हीं निदेश दिया गया कि डिवाइडर के दीवारों पर रंग-बिरंगी कलाकृतियां एवं स्वच्छ भारत का लोगो (स्वहव) आदि का दीवार लेखन कराया जाए।

 इस दौरान सड़कों के दोनों ओर लगाये जा रहे पेभर्स ब्लाॅक का अवलोकन करते हुए संबंधित विभाग को निदेश दिया गया कि सड़क के दोनों ओर दीवार से 2.5 फीट जगह छोड़कर पेभर्स ब्लाॅक लगाया जाय; ताकि उन जगहों  का प्रयोग वृक्षारोपण, फूल-पत्ती, घास आदि लगाने के लिए किया जा सके। साथ हीं उन्होंने कहा कि विभिन्न जगहों पर दीवार लेखन का कार्य भी कराया जाय। उन्होंने आगे कहा कि सड़क के बीचों-बीच फूल-पत्ती एवं सड़कों के किनारे वृक्ष लगाये जाने से यात्रियों का सफर आनन्दायक तो होता हीं है। साथ हीं इससे  वाहनों से होने वाले प्रदूषण को भी कम करने में मदद मिलती हैजिससे किसी भी तरह का दुर्घटना होने से बचेगा जनता यहाँ तो परिवहन विभाग मैं सिर्फ परिवहन पदाधिकारी को सिर्फ मोबाइल चेकिंग जिसमें रुपये का अँधाधुन खेल होता है कोई प्रशासन नाम का चीज हि नहीं है जब भी परिवहन कार्यलय जाईये पूछिए Dto साहब कहाँ है तो स्टाप कहेगे सर अररिया गये हैं लेकिन मुद्रा बंटवारा वक्त चले आते है कितना भी एक्सीडेंट हो परिवहन विभाग को कोई गम नहीं ॥

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जाने क्या हैं होम लोन पर टैक्स के बेनेफिट – INDIA NEWS LIVE

Apr 12, 2018

 INDIA NEWS LIVE –

क्या अपना मकान होने पर भी कोई नौकरीपेशा होम रेंट एलाउंस (HRA) का फायदा ले सकता है, क्योंकि एचआरए वह राशि होती है जो नियोक्ता की ओर से कर्मचारी को किराए के घर में रहने पर दी जाती है? यह एक ऐसा सवाल है जो बहुत से करदाताओं को उस समय असमंजस में डाल देता है जब वे अपना इनकम टैक्स रिटर्न फाइन कर रहे होते हैं।

ज्यादातर करदाता इस बात को नहीं जानते होंगे आप दोनों बेनेफिट एक साथ कब और किस स्थिति में ले सकते हैं। अपनी इस खबर में हम आपको एक्सपर्ट की मदद से यह बता रहे हैं कि आप किस स्थिति में होमलोन के साथ भी एचआरए का फायदा उठा सकते हैं।

पहले समझिए किसे मिलता है HRA: हाउस रेंट अलाउंस पर टैक्स लाभ का फायदा सिर्फ वही व्यक्ति ले सकता है, जो अपने नियोक्ता से एचआरए प्राप्त करता है। यह सेल्फ एम्प्लॉयड व्यक्ति के लिए नहीं होता है। इसका लाभ उठाने के लिए, कर्मचारी की ओर से किराए पर खर्च करना अनिवार्य होता है। साथ ही इसके लिए करदाता का उस जगह पर रहना भी जरूरी है जिसके लिए वह किराया दे रहा है। बिना किराए पर रहे एचआरए का दावा नहीं किया जा सकता।

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भारतीय रेल में स्मार्ट कोच का युग जल्द शुरू होने जा रहा है, इसमें एशो-आराम की वे सभी सुविधाएं मुहैया होंगी, जो अमूमन हवाई जहाज और फाइव स्टार होटलों में हुआ करती हैं। – INDIA NEWS LIVE

Apr 11, 2018

INDIA NEWS LIVE –

भारतीय रेल में स्मार्ट कोच का युग जल्द शुरू होने जा रहा है। कपूरथला, पंजाब स्थित रेल कोच फैक्टरी (आरसीएफ) ने देश के पहले स्मार्ट कोच का निर्माण शुरू कर दिया है। इसमें एशो-आराम की वे सभी सुविधाएं मुहैया होंगी, जो अमूमन हवाई जहाज और फाइव स्टार होटलों में हुआ करती हैं। 

साढ़े तीन करोड़ रुपए की लागत से बनने जा रहा पहला कोच जून तक तैयार हो जाएगा।

स्मार्ट कोच में सभी अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी। कॉल बेल, वाई-फाई, एलईडी लाइट्स, आरामदायक सीट, सेंटर टेबल, मोबाइल व लैपटॉप चार्जिंग के अलावा खिड़कियों पर कंप्यूटराइज्ड ऑटोमैटिक पर्दे लगे होंगे, जिन्हें रिमोट के जरिए उतारा-चढ़ाया जा सकेगा। कोच के बाहर इलेक्ट्रानिक रिजर्वेशन चार्ट लगेगा। ऑटोमैटिक कंपैक्ट अरेंजमेंट वाले डस्टबिन लगेंगे।

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उतरौला : एटीएम मशीनें एटीएम कार्ड धारको के लिये शोपीस बनी-SUSHIL SRIVASTVA सुशील श्रीवास्तव की एक रिर्पोट ,उतरौला

Apr 6, 2018

सुशील श्रीवास्तव की एक रिर्पोट ,उतरौला

उतरौला-तहसील मुख्यालय पर लगे लगभग एक दर्जन एटीएम मशीनें एटीएम कार्ड धारको के लिये शोपीस बनी हैं । कुछ तो खराब तो कुछ में पैसा ही नही रहता ।
एटीएम मशीनों में पैसों के अभाव के चलते खाता धारकों को अपने ही पैसों को पाने के लिये बैंकों में घण्टो लाइनों में लगा रहना पड़ता है अथवा दूर दराज के एटीएम से सम्पर्क करना पड़ता है । आश्चर्य की बात तो यह है कि जिन बैंकों के एटीएम लगे हैं उन बैंकों के पास भी एटीएम में पैसों को डालने के लिये पैसा ही नही है । एक मात्र एच डीएफसी बैंक का एटीएम है जो उतरौला क्षेत्रवासियों को एटीएम सुविधा उपलब्ध कराने में अपनी अहम भूमिका निभा रहा है । जबकि भारतीय स्टेट बैंक की स्थापित दो एटीएम के शटर तो खुलने का नाम ही नही ले रहे हैं ।सहालग के इन दिनों में अधिकांश लोग शादियों में सम्मलित होने अपने पैतृक गावँ आये हैं लेकिन उनको भी उतरौला के ठप पड़े एटीएम मुँह चिढ़ा रहे हैं । नगरवासी प्रताप सिंह,उमानंद गुप्त,शिव कुमार गुप्ता, गुरवेन्दर सिंह,मोहम्मद उस्मान,जावेद हसन,समेत तमाम लोंगों ने नवांगतुक जिलाधिकारी से माँग की है कि उतरौला की शोपीस बनी एटीएम मशीनों की दशा में सुधार लाया जाए ।

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कुरुक्षेत्र : अंग्रेजों को सब्जी की खेती सीखा रहे है कुरुक्षेत्र के प्रगतिशील किसान हरबीर-RAKESH SHARMA

Apr 3, 2018

RAKESH SHARMA

कुरुक्षेत्र। 3 अप्रैल राकेश शर्मा शाहबाद के गांव डाडलू निवासी हरबीर सिंह ने रोजगार पाने की खातिर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से एमए की डिग्री हासिल की। इस नौजवान का कृषि से कोई लम्बा चौड़ा नाता भी नहीं था। महज दो कनाल की भूमि वाले इस नौजवान के सिर पर एकाएक सब्जी की खेती करने का एक ऐसा जनून सवार हुआ कि आज हरबीर सिंह अपने आपको एक प्रगतिशील किसान के रुप में स्थापित कर चुके है। अहम पहलु यह है कि युवा प्रगतिशील किसान हरबीर सिंह अब अंग्रेजों को सब्जी की खेती करने के गुर सीखा रहे है। इस प्रगतिशील किसान को राज्य सरकार की तरफ से निंरतर प्रोत्साहित किया जा रहा है और सरकार की तमाम योजनाओं का फायदा दिया जा रहा है।

शाहबाद से कुछ किलोमीटर दूर गांव डाडलू में प्रगतिशील किसान हरबीर सिंह ने वर्ष 2005 में 2 कनाल क्षेत्र में सब्जियों की नर्सरी लगाने का एक मात्र प्रयास शुरु किया। हरबीर सिंह के प्रयास पूरे मन के साथ शुरु किए गए थे, इसलिए धीरे-धीरे दो कनाल से आज 14 एकड़ भूमि पर सब्जियों की नर्सरी को स्थापित किया। उनकी नर्सरी की पौध इतनी उत्तम है कि लगभग 8 हजार से ज्यादा किसान सब्जी फार्म हाउस से जुड़े है और सब्जियों की पौध भी खरीदते है। इतना ही नहीं हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, हिमाचल, राजस्थान, उतराखंड, बिहार सहित अन्य राज्यों से किसान उनकी पौध को देखने और खरीदने के लिए पहुंचते है। इन राज्यों के साथ-साथ पिछले 2 वर्षो से किसान हरबीर सिंह की पौध की मांग इटली जैसे देशों में भी की जा रही है। प्रगतिशील किसान हरबीर सिंह ने विशेष बातचीत करते हुए बताया कि नर्सरी में सब्जी की पौध की गुणवता पर विशेष फोकस रखा जा रहा है और गुणवता से किसी प्रकार का कोई समझौता भी नहीं है। इस नर्सरी में टपका व फव्वारा सिंचाई तकनीकी को अपनाकर हरी मिर्च, शिमला मिर्च, टमाटर, गोभी, प्याज, बैंगन जैसी सब्जियों के साथ-साथ पपीते के फल की पौध भी तैयार की जा रही है। इस नर्सरी में करीब 200 लोगों को रोजगार के अवसर भी मुहैया करवाए जा रहे है। उन्होंने कहा कि लगभग 2 एकड़ जमीन पर 150 से ज्यादा किस्मों के विभिन्न मल्टीनेश्रल कम्पनियों के बीज ट्रायल के तौर पर प्रतिवर्ष लगा रहे है। इन बीजों के सफल परीक्षण के पश्खत ही उत्तम पौध किसानों के लिए तैयार की जा रही है। उन्होंने छोटी जोत के किसानों को प्रेरित करते हुए कहा कि किसानों को लक्ष्य निर्धारित कर मेहनत से काम करने की जरुरत है।

किन-किन देशों के डेलिगेट सीख रहे है खेती के गुर

हरबीर सिंह के नर्सरी फार्म हाउस पर इंग्लैंड, हालैंड, आफगानिस्तान, इजराईल, बांग्लादेश, नेपाल आदि देशों के डेेलिगेटस पहुंचते है। इन सभी देशों के प्रतिनिधि सब्जी की खेती करने के गुर सीखते है। इसके अलावा हरबीर सिंह के फार्म हाउस पर किसानों को अप टू डेट करने के लिए प्रतिवर्ष 4 से 5 राज्य व जिलास्तरीय सैमिनारों का आयोजन बागवानी विभाग के सहयोग से किया जा रहा है।

कौन-कौन से अवार्ड मिले प्रगतिशील किसान हरबीर सिंह को

प्रगतिशील किसान हरबीर सिंह को वर्ष 2015 में हरियाण को सर्वोतम होर्टिक्लचर का खिताब मिला। इसके पश्चात वर्ष 2017 में एनजीरंगा राष्ट्रीय अवार्ड इंडियन कांसिल ऑफ रिसर्च द्वारा प्रदान किया गया। इतना ही नहीं अभी हाल में ही रोहतक राज्यस्तरीय किसान सम्मेलन में भी मुख्यमंत्री मनोहर लाल व कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने भी सम्मानित किया है।

विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों का शोध केन्द्र बना नर्सरी फार्म हाउस

प्रगतिशील किसान हरबीर सिंह ने खेती में वैज्ञानिक तकनीकों का अपनाया। इस सफलता को अपनी आंखों से देखने के लिए नर्सरी फार्म हाउस पर कृषि विश्वविद्यालयों व कृषि संस्थानों से विद्यार्थी ट्रेनिंग लेने के लिए पहुंचते है। इतना ही नहीं हरबीर सिंह कृषि विश्वविद्यालयों व संस्थानों में बतौर प्रवक्ता के रुप में अपनी सेवाएं दे रहे है।

45 पैसे से लेकर 1.50 पैसा प्रति पौधा 

हरबीर सिंह बताते है कि पौध तैयार करने का उसका कार्य आज काफी बड़े स्तर पर है। जिला में ही नहीं अपितु प्रदेश भर में निजी स्तर पर इतने क्षेत्र में किसी किसान का पौध उत्पादन नहीं है। वर्ष 2015-16 में 48 लाख टमाटर, 32 लाख शिमला मिर्च, 52 लाख मिर्च, 35 लाख गोभी, 682.5 लाख प्याज की पौध का उत्पादन किया। पौध की कीमत 45 पैसा प्रति पौधा से लेकर 1.50 पैसा प्रति पौधा वैरायटी के साथ तय की गई है।

ताइवान में पपीते की मांग 

हरबीर सिंह के हाइटेक फार्म पर हर प्रकार की सब्जी से लेकर फल की पौध तैयार की जाती है। पिछले दो सालों से मिर्च के 20 हजार पौधे इटली भेजे जा रहे हैं तो ताइवान में पपीते के बीजों की अच्छी खासी मांग है। ताइवान में 50 हजार पौधे तैयार कर भेजे जा चुके हैं। 

पहले कीजिए बुकिंग, फिर मिलेगी पौध

हरबीर सिंह बताते है कि उनके फार्म पर हरी मिर्च, शिमला मिर्च, टमाटर, गोभी, प्याज, बैंगन सहित अन्य पौध तैयार की जाती है। उच्च गुणवत्ता की वजह से अन्य राज्यों के किसान उनके फार्म पर आकर पौध खरीदते हैं। बढ़ रही मांग के कारण पौध लेने के लिए तीन दिन पहले बुकिंग करानी पड़ती है। पौध के लिए प्रयोग में लाए जाने वाले बीज विदेशी और उच्च गुणवत्ता के होते हैं जिसके चलते ही पौध की मांग बढ़ रही है।

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